गुरु बिन मोक्ष क्यों नहीं ? नमस्कार दोस्तों आज प्रत्येक मनुष्य अनेकों धर्म में अनेकों प्रकार के भगवानों, देवताओं की साधना करते हैं आखिर वो यह साधना क्यों करते हैं। इसकी क्या वजह है कि वह तरह-तरह के मार्ग अपनाते हैं अनेकों प्रकार की पूजा विधि करते हैं। तो आप बता दें यह सब क्रियाएं केवल और केवल सुख शांति व मोक्ष प्राप्त करने के लिए की जाती है। मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य केवल और केवल मोक्ष प्राप्त करना है क्योंकि परमात्मा ने मनुष्य को अपने स्वरूप का बनाया है। और मनुष्य स्वरूप में ही जीव आत्मा मोक्ष प्राप्त कर सकती है। यहां तक कि देवता गण भी मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते। मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य:- सभी लोग जानते हैं कि मनुष्य जीवन का परम उद्देश्य भगवान की प्राप्ति करना तथा जन्म मरण के चक्र से मुक्त होना है। आपको यह बात भी पता है कि भगवान की सत्य भक्ति के बिना मनुष्य कभी भी सुख से नहीं रह सकता तथा मोक्ष भी नही पा सकता। मोक्ष प्राप्ति के लिए अनेकों धर्म के लोग अनेकों प्रकार की क्रियाकलाप ...
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Maghar Leela Of God Kabir
# MagharLeela_Of_GodKabir मगहर में कबीर साहेब ने की अद्भुत लीला! मगहर में कबीर साहेब के सशरीर सतलोक जाने के बाद उनके हिन्दू और मुस्लिम शिष्यों के बीच विवाद हो गया। मगहर के राजा बिजली खाँ पठान और बनारस के राजा बीर सिंह बघेल के बीच कबीर साहेब के अंतिम संस्कार को लेकर बहुत मतभेद हुआ। लेकिन कबीर साहेब के जाने के बाद चादर के नीचे उनके शरीर के बदले केवल फूल मिले। उसके बाद दोनों धर्म के लोगों ने आधे आधे फूल बाँट लिए। मगहर रियासत के अकाल प्रभावित स्थान में गोरखनाथ जैसे सिद्ध पुरुष भी बारिश करवाने में नाकाम रहे थे। लेकिन परमात्मा कबीर जी ने वहां बारिश करवाकर दिखा दी थी और साबित कर दिया कि वही जगत पालनहार हैं। कबीर परमात्मा मगहर से सशरीर सतलोक गए थे! जिंदा जोगी जगत् गुरु, मालिक मुरशद पीर। दहूँ दीन झगड़ा मंड्या, पाया नहीं शरीर।। परमात्मा कबीर जी के शरीर को प्राप्त करने के लिए दोनों ही दीन, हिंदू और मुसलमान आपस में झगड़े की तैयारी करके मगहर आए थे लेकिन जब शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल मिले तो दोनों आपस में लिपट लिपट कर रोने लगे। Kabir #MagharLeela_Of_GodKabir 5 Ju...
काल (ब्रह्म) कौन है?
काल कौन है? काल (ब्रह्म) 21 ब्रह्माण्डों का स्वामी है। ॐ (ओम) नाम ब्रह्म काल का सांकेतिक मंत्र है श्री दुर्गा जी इसकी पत्नी है तथा ब्रह्मा जी, विष्णु जी और शंकर जी इस के पुत्र हैं। काल ब्रह्म को एक लाख मनुष्य शरीर धारी प्राणियों को प्रतिदिन खाने का श्राप लगा हुआ है। काल ने प्रतिज्ञा ले रखी है कि वह किसी के भी सामने प्रकट नहीं होगा प्रथम बार व आखरी बार वह केवल श्री अर्जुन के सामने ही महाभारत के युद्ध के दौरान प्रकट हुआ व गीता जी का ज्ञान बोलकर चला गया। जबकि कुछ लोग मानते हैं कि श्रीकृष्ण ही श्री कृष्ण ही काल का अवतार थे लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है ।
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